ये कहानी है एक ऐसे बच्चे की
जिसकी माँ तो जा चुकी है पर उसके लिए अभी उसके साथ है
मेरे पीठ को थपथपाते तेरे हाथ
याद आते है जब भी उठती है तेरी बात
मेरे हर छोटी भूल हर गुस्ताखी पर
याद आते है तेरी वो घंटो डांट
मै जब भी गिर जाता खरोंचे आ जाती है
तेरी जादू वाली फूंक हमेशा काम आती है
जब भी पापा की ऊँगली पकड़ के चलता हूँ
दूजे हाथों को तेरी ऊँगली खल जाती है
जब भी सोया न मै आधी में होकर बेचैन तू मुझको सुलाती है
कहते है वो तू तारों में जा बैठी है , माँ क्या इसलिए तू मुझे सुलाने नहीं आती है
माँ तेरी याद आती है,
नन्हे हाथों को ऊँगली पकड़ के लिखना सिखाया तूने
मेरे भूलों को भी मिटाना बताया तूने , पर अब मैं अकेला किताबों संग हूँ ,
अब मैंने जाना की गलती क्यों अक्सर हो जाती है
जब भी शीशे में खुद को देखता हूँ, सर पे मेरे हाथ फेरे तू कड़ी पास मेरे नजर आती है
अब ना रहे तू , कहते है समझाते है , फुसलाते है मुझे ,
पर जान तेरी देख ना माँ , तेरी जान में अभी बाकी है

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