Jis lehrate Tirange ko ... | Audible Hindi Poetry 2020 on Patriotism






ये कहानी है एक ऐसे बच्चे की 

जिसकी माँ तो जा चुकी है पर उसके लिए  अभी उसके साथ है 


मेरे पीठ को थपथपाते तेरे हाथ 

याद आते है जब भी उठती है तेरी बात 

मेरे हर छोटी भूल हर गुस्ताखी पर 

याद आते है तेरी वो घंटो डांट 


मै जब भी गिर जाता खरोंचे आ जाती है 

तेरी जादू वाली फूंक हमेशा काम आती है 

जब भी पापा की ऊँगली पकड़ के चलता हूँ 

दूजे हाथों को तेरी ऊँगली खल जाती है 

जब भी सोया न मै आधी में होकर बेचैन तू मुझको सुलाती है 

कहते है वो तू तारों में जा बैठी है , माँ क्या इसलिए तू मुझे सुलाने नहीं आती है 

माँ तेरी याद आती है, 

नन्हे हाथों को ऊँगली पकड़ के लिखना सिखाया तूने 

मेरे भूलों को भी मिटाना बताया तूने , पर अब मैं अकेला किताबों संग हूँ , 

अब मैंने जाना की गलती क्यों अक्सर हो जाती है 


जब भी शीशे में खुद को देखता हूँ, सर पे मेरे हाथ फेरे तू कड़ी पास मेरे नजर आती है 

अब ना रहे तू , कहते है समझाते है , फुसलाते है मुझे , 

पर जान तेरी देख ना माँ , तेरी जान में अभी बाकी है 

 


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